1 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेगी। इस दौरान सरकार देश की आर्थिक स्थिति का पूरा लेखा-जोखा संसद के सामने रखेगी। बजट में जहां एक ओर राजस्व और खर्च का विवरण होगा, वहीं दूसरी ओर नई योजनाओं की घोषणा और मौजूदा योजनाओं के लिए धन आवंटन पर भी बड़ा फोकस रहेगा।
Atal Pension Yojana: बजट 2026 से पहले सरकार का बड़ा फैसला, गारंटी पेंशन योजना 2030-31 तक बढ़ी
1 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेगी। बजट के जरिए सरकार देश की आर्थिक स्थिति, खर्चों का ब्यौरा, नई योजनाओं और विभिन्न सेक्टर्स के लिए फंड आवंटन का ऐलान करेगी। लेकिन बजट से पहले ही सरकार ने करोड़ों लोगों को बड़ी राहत देते हुए अहम फैसला ले लिया है।
केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और कम आय वर्ग के लोगों के लिए चलाई जा रही अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह फैसला लाखों गरीब और मेहनतकश नागरिकों के लिए बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में सामाजिक सुरक्षा और एमएसएमई सेक्टर से जुड़े दो अहम निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने न केवल अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी, बल्कि इसके प्रचार, जागरूकता और विस्तार से जुड़ी गतिविधियों के लिए अतिरिक्त फंडिंग को भी हरी झंडी दी।
इसके साथ ही योजना को दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए गैप फंडिंग जारी रखने का भी फैसला किया गया है। इससे योजना की पहुंच असंगठित क्षेत्र के अधिक से अधिक श्रमिकों और कम आय वाले लोगों तक सुनिश्चित की जा सकेगी।
क्या है अटल पेंशन योजना?
अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को की गई थी। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में नियमित और सुनिश्चित आय प्रदान करना है।
- इस योजना के तहत 60 वर्ष की उम्र के बाद
- ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है
- पेंशन की राशि व्यक्ति के योगदान पर निर्भर करती है
19 जनवरी 2026 तक इस योजना से 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जिससे यह देश की सबसे सफल सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल हो चुकी है। सरकार का मानना है कि योजना के विस्तार से भारत को पेंशन आधारित समाज बनाने में मदद मिलेगी और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
सिडबी को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता
कैबिनेट ने एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने को भी मंजूरी दी है। यह राशि वित्तीय सेवा विभाग के माध्यम से तीन चरणों में दी जाएगी—
- वित्त वर्ष 2025-26: ₹3,000 करोड़
- वित्त वर्ष 2026-27: ₹1,000 करोड़
- वित्त वर्ष 2027-28: ₹1,000 करोड़
इस पूंजी निवेश से सिडबी की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और वह एमएसएमई को अधिक मात्रा में सस्ता कर्ज उपलब्ध करा सकेगा।
नए एमएसएमई और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
सरकार के अनुसार, इस इक्विटी निवेश के बाद सिडबी के जरिए वित्तीय सहायता पाने वाले एमएसएमई की संख्या 76.26 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है। यानी लगभग 25.74 लाख नए एमएसएमई को सीधा लाभ मिलेगा।
मौजूदा आंकड़ों के आधार पर इससे करीब 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है, क्योंकि औसतन हर एमएसएमई लगभग 4 लोगों को रोजगार देता है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल लोन, बिना गारंटी कर्ज, स्टार्टअप्स को वेंचर डेट और एमएसएमई फाइनेंसिंग बढ़ने से सिडबी की जोखिम भारित परिसंपत्तियां बढ़ेंगी। ऐसे में मजबूत पूंजी आधार जरूरी है, ताकि CRAR और क्रेडिट रेटिंग सुरक्षित बनी रहे।
निष्कर्ष
अटल पेंशन योजना के विस्तार से जहां करोड़ों लोगों को बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, वहीं सिडबी को दी गई इक्विटी सहायता से एमएसएमई सेक्टर को सस्ता कर्ज, नए रोजगार और तेज विकास का रास्ता मिलेगा। ये दोनों फैसले देश की अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी, मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।
