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Pregnant Usha Vance smiling warmly, wearing a stylish blue maternity dress, gently cradling her baby bump in a bright, airy indoor setting with pastel-toned decorations.
World

उषा वेंस प्रेग्नेंट: चौथे बच्चे की खुशखबरी, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दी जानकारी

by keval January 21, 2026
written by keval

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी पत्नी, सेकंड लेडी उषा वेंस, इस जुलाई के अंत में अपने परिवार में नए सदस्य का स्वागत करने वाले हैं। दंपति ने हाल ही में सोशल मीडिया पर इस खुशी की खबर साझा की। यह उनका चौथा बच्चा होगा, जो उनके तीन बच्चों—इवान, विवेक और मिराबेल—के परिवार में शामिल होगा।

उषा वेंस की घोषणा

उषा वेंस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, “हम अपने परिवार में एक नए सदस्य के जुड़ने की खबर साझा करते हुए बेहद उत्साहित हैं।” उन्होंने अपने पति जेडी वेंस के बयान को भी शेयर किया, जिसमें उपराष्ट्रपति ने बताया कि दोनों एक बेटे की उम्मीद कर रहे हैं। उनके बयान में कहा गया, “हम बेहद खुश हैं कि उषा हमारे चौथे बच्चे की मां बनने वाली हैं। माता-पिता और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, और हम जुलाई के अंत में उनका स्वागत करने के लिए बेहद उत्साहित हैं।”

मेडिकल स्टाफ का आभार

जेडी वेंस ने इस अवसर पर उन मेडिकल प्रोफेशनल्स का धन्यवाद भी किया जो उनके परिवार का ख्याल रख रहे हैं। उन्होंने लिखा, “इस व्यस्त और रोमांचक समय में, हम उन सैन्य डॉक्टरों और स्टाफ सदस्यों के बहुत आभारी हैं, जो सुनिश्चित करते हैं कि हमारा परिवार सुरक्षित और खुशहाल रहे, ताकि हम अपने बच्चों के साथ जीवन का आनंद लेते हुए देश की सेवा कर सकें।”

पहले से तीन बच्चे

उषा और जेडी वेंस के पहले ही तीन बच्चे हैं—दो बेटे, इवान और विवेक, और एक बेटी, मिराबेल। चौथे बच्चे के आने से उनका परिवार और भी बढ़ जाएगा।

उषा वेंस का भारतीय संबंध

उषा वेंस का जन्म और पालन-पोषण कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में हुआ। उनके माता-पिता भारत के आंध्र प्रदेश से अमेरिका आए थे। उनके पिता मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जबकि उनकी मां एक मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट हैं।

पेशेवर जीवन और शिक्षा

उषा वेंस ने 2010 में येल लॉ स्कूल में जेडी वेंस से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने एक प्रतिष्ठित लीगल करियर बनाया। उन्होंने सैन फ्रांसिस्को की कंपनी मंगेर टोल्स एंड ओल्सन में कॉर्पोरेट लिटिगेटर के रूप में काम किया। इसके अलावा, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स और ब्रेट कैवनॉ के लिए लॉ क्लर्क के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं।

January 21, 2026 0 comments
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Modern Indian home with WiFi 7 router showing ultra-fast internet speeds through glowing digital waves, multiple devices connected, vibrant and futuristic setting
Technology

6GHz बैंड पर बड़ा कदम: घरों में बढ़ेगी इंटरनेट स्पीड, WiFi 7 राउटर होंगे उपलब्ध

by keval January 21, 2026
written by keval

भारत सरकार ने 6GHz स्पेक्ट्रम के निचले हिस्से (5925-6425 मेगाहर्ट्ज) को बिना लाइसेंस उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है। इसका मतलब है कि अब घरों में इंटरनेट की गति तेज होगी और WiFi 7 राउटर्स आसानी से उपलब्ध होंगे।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस फैसले को अंतिम रूप दे दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल घरों में वाई-फाई स्पीड में सुधार होगा, बल्कि मोबाइल डेटा पर खर्च भी कम हो सकता है।


6GHz स्पेक्ट्रम से आम लोगों को क्या फायदा?

बिना लाइसेंस 6GHz बैंड का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलने से डिजिटल कनेक्टिविटी के नए अवसर खुलेंगे। अब बाजार में WiFi 6E और WiFi 7 सपोर्टेड राउटर्स उपलब्ध होंगे। इन राउटर्स के घरों में लगाने से:

  • डाउनलोड और अपलोड स्पीड में सुधार होगा
  • वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन गेमिंग बिना लैग के संभव होंगे
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अधिक सहज और रुकावट-मुक्त होगी

इसके साथ ही, जो स्पेक्ट्रम पहले लाइसेंस आधारित था, उसे अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल और टेलिकॉम सेवाओं में इस्तेमाल किया जा सकेगा।


WiFi 6E और WiFi 7 राउटर क्यों जरूरी हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, WiFi 6E और WiFi 7 राउटर अत्याधुनिक तकनीक का लाभ घर तक लाएंगे।

  • WiFi 6E राउटर 6GHz बैंड का उपयोग कर तेज इंटरनेट प्रदान करते हैं
  • WiFi 7 राउटर नई तकनीकों के साथ लो लेटेंसी और हाई थ्रूपुट ऑफर करेंगे
  • ऑनलाइन गेमिंग, 4K/8K वीडियो स्ट्रीमिंग और क्लाउड-आधारित काम बिना रुकावट संभव होंगे

इसका मतलब है कि अब घर में इंटरनेट का अनुभव बिल्कुल स्मूद और हाई-स्पीड होगा।


टेलिकॉम और टेक कंपनियों में थी लंबी खींचतान

6GHz स्पेक्ट्रम को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। टेलिकॉम कंपनियां इसे 5G नेटवर्क बढ़ाने के लिए चाहती थीं, जबकि टेक कंपनियां इसे घरों में वाई-फाई स्पीड बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना चाहती थीं।

पिछले साल मई में दूरसंचार विभाग ने इस बैंड के 500 मेगाहर्ट्ज हिस्से को इनडोर WiFi के लिए खुला प्रस्ताव दिया था। तब टेलिकॉम कंपनियों ने इसका विरोध किया। अब सरकार ने संतुलित निर्णय लिया है, जिससे दोनों उपयोग संभव होंगे –

  • 5G नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना
  • घरों में हाई-स्पीड WiFi उपलब्ध कराना

निष्कर्ष

यह कदम भारत के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए मील का पत्थर साबित होगा। अब घरों में तेज़ इंटरनेट, बेहतर वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन गेमिंग और क्लाउड-आधारित काम स्मूद और सहज तरीके से किया जा सकेगा। WiFi 6E और WiFi 7 राउटर्स के आने से इंटरनेट अनुभव नई ऊँचाइयों तक पहुंच जाएगा।

January 21, 2026 0 comments
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Confident Indian nurse in uniform holding a clipboard, standing in a modern Japanese hospital with Japanese flag overlay.
Jobs

नर्सिंग का कोर्स किया है? जापान में नौकरी पाने का सुनहरा मौका, जानिए सभी शर्तें

by keval January 21, 2026
written by keval

जापान में नर्सिंग जॉब्स भारतीयों के लिए:
जापान में हेल्थकेयर सेक्टर में काम करने के लिए एक खास वीजा दिया जा रहा है, जिससे भारतीय नर्सों के लिए नौकरी करना आसान हो गया है। बूढ़ती आबादी और हेल्थकेयर वर्कर्स की कमी के कारण जापान विदेश से स्किल्ड वर्कर्स को आमंत्रित कर रहा है। यदि आपने भारत में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की है, तो अब आपके पास जापान जाकर काम करने का अवसर है।

भारत से जापान तक: नर्सों के लिए अवसर
पिछले कई वर्षों से भारतीय नर्स और केयरगिवर्स विदेश में जॉब करने के लिए जाते रहे हैं। अब जापान भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है। यहाँ हेल्थकेयर सेक्टर को मजबूत करने के लिए जापानी सरकार ने ‘Specified Skilled Worker (SSW)’ वीजा की सुविधा दी है। इसके तहत विदेशी नर्स और केयरगिवर्स को जापान में काम करने का मौका मिलता है।

यह वीजा उन लोगों को दिया जाता है जिनके पास:

  • जापानी भाषा का ज्ञान हो
  • अपनी फील्ड में पर्याप्त स्किल और अनुभव हो

हाल ही में हेल्थकेयर सेक्टर में वर्कर्स की कमी बढ़ी है, इसलिए नर्सिंग में करियर बनाने वालों के लिए यह वीजा सुनहरा अवसर साबित हो रहा है।


जापान में नर्स बनने के लिए जरूरी शर्तें

जापान में नर्सिंग जॉब पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं:

  1. जापानी भाषा सीखना:
    सबसे पहले आपको जापानी भाषा में दक्ष होना होगा। इसके लिए आपको Japanese Language Proficiency Test (JLPT) देना होगा और कम से कम N4 लेवल पास करना अनिवार्य है।
  2. नर्सिंग लाइसेंस एग्जाम:
    इसके बाद आपको जापान में नर्सिंग लाइसेंस एग्जाम भी क्लियर करना होगा। यह साबित करता है कि आपकी नर्सिंग की स्किल और ज्ञान जापान के मानकों के अनुरूप हैं।

इन दोनों शर्तों को पूरा करने के बाद कोई भी भारतीय नर्स जापान में नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है।


भारत और जापान की संयुक्त ट्रेनिंग पहल

भारत और जापान की सरकारें मिलकर नर्सों और केयरगिवर्स को विशेष ट्रेनिंग दे रही हैं। इसके तहत:

  • SSW वीजा के लिए प्रशिक्षण: भारतीय नर्स और केयरगिवर्स को जापानी भाषा और पेशेवर स्किल्स में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
  • अच्छी सैलरी: जापान में नर्सों को उनकी योग्यता और अनुभव के अनुसार आकर्षक सैलरी दी जा रही है।
  • 5 साल का लक्ष्य: भारत और जापान ने अगले पांच सालों में 5 लाख लोगों के आदान-प्रदान का लक्ष्य रखा है, जिसमें 50 हजार स्किल्ड वर्कर्स जापान जाएंगे।

राज्य सरकारें नेशनल स्किल डेवलपमेंट बॉडी के साथ मिलकर लोगों को ट्रेनिंग दे रही हैं ताकि वे SSW वीजा के लिए योग्य बन सकें।


निष्कर्ष

अगर आपने नर्सिंग का कोर्स किया है और विदेश में काम करने का सपना देखा है, तो जापान आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। जापानी भाषा सीखकर और लाइसेंस एग्जाम पास करके आप यहां अच्छी सैलरी और स्थिर करियर पा सकते हैं।

जापान नर्सिंग में करियर बनाने के इच्छुक भारतीयों के लिए नई राह खोल रहा है, और यह मौका हाथ से जाने न दें।

January 21, 2026 0 comments
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Dhurandhar Bollywood box office update poster featuring a heroic male action star with film reels, cinema tickets, and glowing cityscape background.
Entertainment

बॉक्स ऑफिस अपडेट: ‘धुरंधर’ 47वें दिन भी बरकरार, ‘द राजा साब’, ‘राहु केतु’ और ‘हैप्पी पटेल’ फिस्स

by keval January 21, 2026
written by keval

बॉक्स ऑफिस पर इस हफ्ते एक ओर जहां ‘बॉर्डर 2’ की धमाकेदार एंट्री होने वाली है, वहीं रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर एक्शन फिल्म ‘धुरंधर’ अभी भी अपनी जबरदस्त कमाई से दर्शकों को हैरान कर रही है। रिलीज के 47वें दिन भी इस फिल्म ने करोड़ों की कमाई कर साबित कर दिया कि यह थमने वाली नहीं है।

वहीं दूसरी ओर, प्रभास की ‘द राजा साब’ को 12वें दिन सबसे बड़ा झटका लगा है। इसी तरह, शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्मों ‘राहु केतु’ और ‘हैप्पी पटेल’ ने केवल पांच दिनों में ही बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ दिया है।

‘धुरंधर’ की लगातार सफलता

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ हर हफ्ते नए रिकॉर्ड बना रही है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह स्पाई-एक्शन फिल्म अब 7वें हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है, और इसके बावजूद आगामी ‘बॉर्डर 2’ की रिलीज का इसका कारोबार प्रभावित नहीं कर रही है।

मंगलवार को ‘ट्यूजडे ऑफर’ के तहत टिकट की कीमतें कम थीं, लेकिन इसका फिल्म की कमाई पर कोई खास असर नहीं पड़ा। इसके विपरीत, प्रभास की ‘द राजा साब’ अब 12वें दिन लाखों तक सिमट गई है। मलयालम, कन्नड़ और तमिल शोज को भी धीरे-धीरे हटा दिया गया है।


‘धुरंधर’ के पास बस दो दिन का मोमेंटम

सनी देओल स्टारर ‘बॉर्डर 2’ 5000 स्क्रीन पर रिलीज हो रही है। इसके लिए वितरकों ने सिंगल स्क्रीन और मल्टीप्लेक्स थिएटर्स को विशेष निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो हफ्तों में ‘बॉर्डर 2’ के लिए कई शोज रिजर्व किए गए हैं। फिल्म का रनटाइम 3 घंटे 16 मिनट है, जिससे यदि थिएटर्स निर्देशों का पालन करते हैं, तो ‘धुरंधर’ के लिए स्क्रीन समय कम हो जाएगा।


‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: 47 दिन में 828 करोड़ पार

Sacnilk के आंकड़ों के अनुसार, ‘धुरंधर’ ने 47वें दिन 1.50 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की। सोमवार को भी कमाई लगभग इतनी ही रही।

सप्ताहवार नेट कलेक्शन (₹ करोड़ में):

  • पहला हफ्ता: 207.25
  • दूसरा हफ्ता: 253.25
  • तीसरा हफ्ता: 172.00
  • चौथा हफ्ता: 106.50
  • पांचवां हफ्ता: 51.25
  • छठा हफ्ता: 26.35
  • सातवां हफ्ता (5 दिन): 11.50

47 दिनों में कुल नेट कलेक्शन: 828.10 करोड़ रुपये


वर्ल्डवाइड कमाई

रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, आर माधवन और सारा अर्जुन की ‘धुरंधर’ ने विदेशों में भी धूम मचाई। ओवरसीज़ कमाई: 293.60 करोड़ रुपये।
देश में ग्रॉस कलेक्शन: 993.40 करोड़ रुपये।
कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस: 1287.00 करोड़ रुपये।

देश और विश्व स्तर पर टॉप कमाई करने वाली फिल्में (₹ करोड़ में):

देशफिल्मकमाई
भारतपुष्पा 21234.10
भारतबाहुबली 21030.42
भारतKGF 2859.70
भारतधुरंधर828.10
वर्ल्डवाइडफिल्मकमाई
वर्ल्डवाइडदंगल2070.30
वर्ल्डवाइडबाहुबली 21788.06
वर्ल्डवाइडपुष्पा 21742.10
वर्ल्डवाइडधुरंधर1287.00

‘द राजा साब’ की हालत

प्रभास की ‘द राजा साब’ अब तक की सबसे कमजोर स्थिति में है। 12वें दिन तेलुगु और हिंदी मिलाकर सिर्फ 73 लाख रुपये की कमाई दर्ज की गई। फिल्म के 300 करोड़ के बजट में अभी तक नेट कलेक्शन केवल 141.43 करोड़ रहा है। वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 201.75 करोड़ रुपये है।


‘हैप्पी पटेल’ और ‘राहु केतु’ का बॉक्स ऑफिस पर फिस्स

बीते शुक्रवार रिलीज़ हुई वीर दास की ‘हैप्पी पटेल’ ने 5वें दिन 27 लाख रुपये की कमाई की। पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा की ‘राहु केतु’ ने इसी दिन 47 लाख रुपये का बिजनेस किया।

5 दिन का नेट कलेक्शन:

  • हैप्पी पटेल: 5.07 करोड़
  • राहु केतु: 5.42 करोड़

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Deepinder Goyal resigns as CEO of Joomato, Albinder Dhindsa takes over leadership
Business

दीपिंदर गोयल ने जोमैटो की पैरेंट कंपनी के CEO पद से दिया इस्तीफा, अल्बिंदर ढींडसा संभालेंगे कमान

by keval January 21, 2026
written by keval

नई दिल्ली: जोमैटो की पैरेंट कंपनी इटर्नल लिमिटेड (Eternal Ltd.) में बड़ा बदलाव हुआ है। कंपनी के ग्रुप सीईओ दीपिंदर गोयल ने पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 1 फरवरी, 2026 से प्रभावी होगा। उनकी जगह अब ब्लिंकिट के सीईओ अल्बिंदर ढींडसा कंपनी की कमान संभालेंगे।

गोयल पूरी तरह कंपनी नहीं छोड़ रहे हैं। वह बोर्ड में वाइस चेयरमैन और डायरेक्टर के रूप में नई जिम्मेदारी निभाएंगे। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब इटर्नल ने अपने तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों में सालाना आधार पर शुद्ध लाभ में 73% की वृद्धि दर्ज की है, जो 102 करोड़ रुपये के आसपास है। इस उछाल ने कंपनी के फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स बिजनेस की मजबूती को प्रदर्शित किया है।


अल्बिंदर ढींडसा संभालेंगे रोजाना के फैसले

दीपिंदर गोयल ने स्पष्ट किया कि अब ऑपरेटिंग निर्णयों की जिम्मेदारी अल्बिंदर ढींडसा संभालेंगे। गोयल ने कहा, “ग्रुप सीईओ के तौर पर वह रोज़मर्रा के काम, ऑपरेटिंग प्राथमिकताओं और बिजनेस निर्णयों का नेतृत्व करेंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ब्लिंकिट के अधिग्रहण और उसे ब्रेकइवन तक पहुँचाने की प्रक्रिया में ढींडसा ने अहम भूमिका निभाई है और वह इटर्नल का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।


जोमैटो की नींव और गोयल की यात्रा

दीपिंदर गोयल ने 2008 में पंकज चड्ढा के साथ जोमैटो की स्थापना की थी। कंपनी की शुरुआत Foodiebay के रूप में हुई थी, जो एक प्लेटफॉर्म था जहां लोग रेस्टोरेंट के मेनू और रिव्यू देख सकते थे। समय के साथ, यह आज की फूड डिलीवरी इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनी बन गई है।

इस बदलाव के तहत गोयल के सभी अनवेस्टेड स्टॉक ऑप्शन (ESOP) वापस कंपनी के पूल में जाएंगे। पिछले एक साल में गोयल ने इटर्नल के बाहर कई नए प्रोजेक्ट्स और रिसर्च वेंचर्स में कदम रखा है। उन्होंने शेयरधारकों को लिखे पत्र में कहा:
“हाल ही में मैं कुछ नए आइडियाज की ओर आकर्षित हुआ हूँ। इनमें उच्च जोखिम वाले एक्सप्लोरेशन और एक्सपेरिमेंट शामिल हैं, जिन्हें सार्वजनिक कंपनी की सीमाओं से बाहर बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।”


January 21, 2026 0 comments
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Shubman Gill holding a cricket bat in Indian T20 jersey
Sports

टी20 विश्व कप के बाद शुभमन गिल बन सकते हैं भारतीय टीम के कप्तान: माइकल क्लार्क की भविष्यवाणी

by keval January 21, 2026
written by keval

नई दिल्ली: टी20 विश्व कप 2026 के लिए भारतीय टीम की घोषणा में शुभमन गिल का नाम नहीं था। हालांकि, वह टी20 टीम में उपकप्तान की भूमिका निभा रहे थे और वनडे तथा टेस्ट टीम में कप्तानी कर चुके हैं। क्रिकेट विशेषज्ञ माइकल क्लार्क का मानना है कि विश्व कप के बाद गिल न केवल टीम में वापसी करेंगे बल्कि कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाल सकते हैं।

विश्व कप से बाहर, लेकिन भविष्य के लिए मजबूत दावेदार

माइकल क्लार्क ने कहा कि गिल सिर्फ विश्व कप की टीम से बाहर हैं। उन्होंने बताया, “गिल इस समय टीम के कप्तान नहीं हैं, इसलिए चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम से बाहर रखा। आगामी न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज उन्हें तैयारी का मौका देगी ताकि वे विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।”

शुभमन गिल की फॉर्म एशिया कप में कुछ निराशाजनक रही, लेकिन क्लार्क का मानना है कि उनका नेतृत्व और बैटिंग स्किल्स उन्हें भविष्य में भारतीय टीम के लिए बेहद अहम खिलाड़ी बनाते हैं।

कप्तानी की संभावना

क्लार्क ने आगे कहा, “टी20 विश्व कप 2026 के बाद, शुभमन गिल टीम में वापसी के साथ ही कप्तानी संभाल सकते हैं। वह शानदार खिलाड़ी हैं और केवल इस समय अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं हैं। उनकी टीम में वापसी और नेतृत्व क्षमता किसी के लिए भी आश्चर्य की बात नहीं होगी।”

माइकल क्लार्क का निष्कर्ष

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने बियॉन्ड क्रिकेट पॉडकास्ट में कहा, “शुभमन गिल अभी भी कप्तानी के मजबूत दावेदार हैं। टीम चयन समय और हाल की फॉर्म के आधार पर हुआ। भारत के पास ओपनिंग में विकल्प हैं, लेकिन गिल की नेतृत्व क्षमता अब भी अचूक है।”

इस प्रकार, शुभमन गिल का भविष्य टी20 टीम में नेतृत्व और प्रदर्शन दोनों के लिहाज से उज्जवल नजर आता है।

January 21, 2026 0 comments
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Symbolic view of Varanasi and Sanatan tradition related to the Jyotish Peeth Shankaracharya controversy
India

ज्योतिष पीठ विवाद: काशी से संबंध, शंकराचार्य चयन प्रक्रिया और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा पूरा मामला

by keval January 21, 2026
written by keval

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। जानिए काशी से संबंध, इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा पूरा घटनाक्रम।

ज्योतिष पीठ और काशी का ऐतिहासिक संबंध

भारतीय सनातन परंपरा को संगठित करने के उद्देश्य से आदि शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में चार प्रमुख मठों की स्थापना की थी। इन्हीं में से एक ज्योतिष पीठ (ज्योर्तिमठ) का काशी से गहरा और ऐतिहासिक संबंध माना जाता है। यही कारण है कि इस पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर उठने वाला हर विवाद धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन जाता है।


माघ मेले से जुड़ा ताजा विवाद

हाल ही में प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान की अनुमति न मिलने के कारण विवाद और गहरा गया। इस घटना के बाद सामने आए कुछ वीडियो, जिनमें बटुकों के साथ दुर्व्यवहार दिखाया गया, ने साधु-संत समाज में रोष पैदा कर दिया। इसके साथ ही ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर चल रहा पुराना विवाद फिर से सुर्खियों में आ गया।


इलाहाबाद हाई कोर्ट का 2017 का आदेश

वर्ष 2017 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद, दोनों के दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि 1941 की डीड के अनुसार ही नए शंकराचार्य का चयन किया जाना चाहिए।

कोर्ट के निर्देशों के तहत यह जिम्मेदारी भारत धर्म महामंडल, काशी विद्वत परिषद और द्वारका, श्रृंगेरी व पुरी पीठ के शंकराचार्यों को सौंपी गई थी।


चयन प्रक्रिया से पहले ही अभिषेक का विवाद

हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद, चयन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही भारत धर्म महामंडल के एक गुट द्वारा स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक कर दिया गया। इसी निर्णय ने विवाद को और जटिल बना दिया, जो आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। वर्तमान में यह मामला शीर्ष अदालत में लंबित है।


काशी में शास्त्रार्थ से हुआ था पहला चयन

ज्योतिष पीठ की पुनः खोज का श्रेय 1941 में भारत धर्म महामंडल की स्थापना करने वाले स्वामी ज्ञानानंद को जाता है। उन्हीं के प्रयासों से पीठ का जीर्णोद्धार संभव हो सका।
काशी के टाउनहॉल मैदान में आयोजित शास्त्रार्थ के माध्यम से स्वामी ब्रह्मानंद को पहला शंकराचार्य चुना गया था, जो इस पद की ऐतिहासिक शुरुआत मानी जाती है।


मठाम्नाय ग्रंथ का महत्व

बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, शंकराचार्य पद से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं मठाम्नाय अनुशासन ग्रंथ पर आधारित होती हैं। इसी ग्रंथ में शंकराचार्य की योग्यता, नियुक्ति, कर्तव्य और आवश्यकता पड़ने पर पद से हटाने तक के नियम स्पष्ट रूप से वर्णित हैं।


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति और विवाद

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद 11 सितंबर 2022 को उनके उत्तराधिकार की घोषणा की गई। वसीयत के आधार पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ और स्वामी सदानंद को द्वारका पीठ की जिम्मेदारी सौंपी गई।

हालांकि, निरंजनी अखाड़े और गोवर्धन मठ से जुड़े कुछ प्रमुख संतों ने इस नियुक्ति को मान्यता नहीं दी, जिससे विवाद और गहरा गया। इसके परिणामस्वरूप शंकराचार्य पद को लेकर कानूनी लड़ाई आज भी जारी है।

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Atal Pension Yojana extended till 2030-31 ahead of Budget 2026, government big relief for unorganised workers and pension beneficiaries in India
Breaking News

बजट 2026 से पहले सरकार का बड़ा फैसला: पेंशन योजना की अवधि 2031 तक बढ़ी, लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लाभार्थियों को राहत

by keval January 21, 2026
written by keval

1 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेगी। इस दौरान सरकार देश की आर्थिक स्थिति का पूरा लेखा-जोखा संसद के सामने रखेगी। बजट में जहां एक ओर राजस्व और खर्च का विवरण होगा, वहीं दूसरी ओर नई योजनाओं की घोषणा और मौजूदा योजनाओं के लिए धन आवंटन पर भी बड़ा फोकस रहेगा।

Atal Pension Yojana: बजट 2026 से पहले सरकार का बड़ा फैसला, गारंटी पेंशन योजना 2030-31 तक बढ़ी

1 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेगी। बजट के जरिए सरकार देश की आर्थिक स्थिति, खर्चों का ब्यौरा, नई योजनाओं और विभिन्न सेक्टर्स के लिए फंड आवंटन का ऐलान करेगी। लेकिन बजट से पहले ही सरकार ने करोड़ों लोगों को बड़ी राहत देते हुए अहम फैसला ले लिया है।

केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और कम आय वर्ग के लोगों के लिए चलाई जा रही अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह फैसला लाखों गरीब और मेहनतकश नागरिकों के लिए बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में सामाजिक सुरक्षा और एमएसएमई सेक्टर से जुड़े दो अहम निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने न केवल अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी, बल्कि इसके प्रचार, जागरूकता और विस्तार से जुड़ी गतिविधियों के लिए अतिरिक्त फंडिंग को भी हरी झंडी दी।

इसके साथ ही योजना को दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए गैप फंडिंग जारी रखने का भी फैसला किया गया है। इससे योजना की पहुंच असंगठित क्षेत्र के अधिक से अधिक श्रमिकों और कम आय वाले लोगों तक सुनिश्चित की जा सकेगी।


क्या है अटल पेंशन योजना?

अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को की गई थी। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में नियमित और सुनिश्चित आय प्रदान करना है।

  • इस योजना के तहत 60 वर्ष की उम्र के बाद
  • ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है
  • पेंशन की राशि व्यक्ति के योगदान पर निर्भर करती है

19 जनवरी 2026 तक इस योजना से 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जिससे यह देश की सबसे सफल सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल हो चुकी है। सरकार का मानना है कि योजना के विस्तार से भारत को पेंशन आधारित समाज बनाने में मदद मिलेगी और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।


सिडबी को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता

कैबिनेट ने एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने को भी मंजूरी दी है। यह राशि वित्तीय सेवा विभाग के माध्यम से तीन चरणों में दी जाएगी—

  • वित्त वर्ष 2025-26: ₹3,000 करोड़
  • वित्त वर्ष 2026-27: ₹1,000 करोड़
  • वित्त वर्ष 2027-28: ₹1,000 करोड़

इस पूंजी निवेश से सिडबी की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और वह एमएसएमई को अधिक मात्रा में सस्ता कर्ज उपलब्ध करा सकेगा।


नए एमएसएमई और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

सरकार के अनुसार, इस इक्विटी निवेश के बाद सिडबी के जरिए वित्तीय सहायता पाने वाले एमएसएमई की संख्या 76.26 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है। यानी लगभग 25.74 लाख नए एमएसएमई को सीधा लाभ मिलेगा।

मौजूदा आंकड़ों के आधार पर इससे करीब 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है, क्योंकि औसतन हर एमएसएमई लगभग 4 लोगों को रोजगार देता है।

सरकार का कहना है कि डिजिटल लोन, बिना गारंटी कर्ज, स्टार्टअप्स को वेंचर डेट और एमएसएमई फाइनेंसिंग बढ़ने से सिडबी की जोखिम भारित परिसंपत्तियां बढ़ेंगी। ऐसे में मजबूत पूंजी आधार जरूरी है, ताकि CRAR और क्रेडिट रेटिंग सुरक्षित बनी रहे।


निष्कर्ष

अटल पेंशन योजना के विस्तार से जहां करोड़ों लोगों को बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, वहीं सिडबी को दी गई इक्विटी सहायता से एमएसएमई सेक्टर को सस्ता कर्ज, नए रोजगार और तेज विकास का रास्ता मिलेगा। ये दोनों फैसले देश की अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी, मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।

January 21, 2026 1 comment
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